Un Limited Zindagi हर कोई एक सलाह जरूर देता है की हर इंसान को ज्यादा से ज्यादा किताबें जरूर पढ़नी चाहिए, पर यहां एक सवाल… कौन सी किताबें कितनी किताबें और कितना पढ़ना चाहिए तो आज यहां हम इस आर्टिकल में जानेंगे एक ऐसी किताब के बारे में जो आपके सोचने और समझने का तरीका बदल देगी… इसे आप खुद भी पढ़ सकते हो तो फिर अपने बच्चो, किसी रिश्तेदार या किसी दोस्त को इसे गिफ्ट भी कर सकते हो
ये पुस्तक है Un Limited Zindagi … लेकिन इसको जानने से पहले कुछ जरूरी बातें… जैसे किताबें क्यों पढ़नी चाहिए
यहां किताबें पढ़ने का तात्पर्य है स्कूली पढ़ाई से नहीं है बल्कि ज्ञान की उस सीमा से हैं जहां आप एक सामाजिक व्यक्ति के रूप में इस दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सके
किताबें एक वह साधन है जो किसी भी व्यक्ति के सोचने की क्षमता, शब्दावली और भाषा कौशल में सुधार करती है किताबें पढ़ने से हमारे रचनात्मक और कल्पना शक्ति का विस्तार होता है जिस से एक व्यक्ति नई विचारधाराओं और दृष्टिकोण को समझ सकता है
वही किताबें तनाव को कम करने और मन को शांत करने में भी सहायक होती है वह हमें विभिन्न संस्कृतियों इतिहास और विचारों से रूबरू करवाती है जिससे हमारी सहानुभूति और भावनात्मक समझ बढ़ती है किताबें हमारे व्यक्तित्व को समृद्ध करती है और जीवन को गहराइयों से समझने में हमारी मदद करती है मतलब यु कह सकते है किताबे… अंततः हमारे जीवन को बेहतर बनाती है
एक इंसान के लिए किताबें पढ़ना उतना ही जरूरी है जितना शरीर के लिए स्वास्थ्य जरूरी है ज्ञान के बिना जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ा जा सकता और यह सिर्फ ज्ञान की ही बात नहीं है वास्तव में किताबें पढ़ना आपके ओवरऑल डेवलपमेंट के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है
कई रिसर्च बताते हैं कि पढ़ने से न केवल आप स्मार्ट बनते हैं बल्कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ यह है आपको शार्प और एनालिटिकल भी बनता है जब आपकी किताबे पढ़ते हैं तो उसे आपके दिमाग की बढ़िया एक्सरसाइज होती है अगर आप लगातार रीडिंग एक्सरसाइज करते हैं तो अपने ब्रेज टिशूज को पॉजिटिवली बदल सकते हैं इससे दिमाग की कनेक्टिविटी भी बढ़ती है और आप अपनी एकाग्रता लेवल और अटेंशन लेवल इस हद तक बेहतर कर सकते हो कि किसी भी काम को करते हुए आपको आलस तक महसूस नहीं होगा
अन-लिमिटेड ज़िंदगी
“संघर्षों के साये मे इतिहास हमारा पलता है,
जिस ओर जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता हैं।”
जी हां… उम्र का वह पड़ाव जहां असीम ऊर्जा से लबरेज़ कोई दुनिया बदलने की हिम्मत और हौसला रखता है… आसमानी ऊंचाइयों तक पहुंचने की जिद और जुनून होता है उम्र के इस पड़ाव को जवानी कहते हैं…
वैसे जवानी का कोई स्थाई पैमाना नहीं होता कोई उम्रभर जवान रहता है तो कोई 20-25 की उम्र में बुढ़ापा महसूस करा देता है… बुढ़ापा मतलब ऊर्जा की कमी… हिम्मत और हौसले की कमी… वैसे 12-13 साल की उम्र से 30-35 तक की उम्र वालो को जवान यानी युवा कहते हैं …
इस उम्र के लोग जिन पर परिवार, समाज, देश के सफल संचालन की जिम्मेदारी को डालने की तैयारी होती है लेकिन जब यह उम्र भटकाव ले लेती है तो सब बंटाधार होने लगता है।
हाल ही मे सीकर जिले के एक लेखक ने युवा शक्ति को संबोधित करते एक किताब लिखी है जिसका नाम “अनलिमिटेड ज़िंदगी” है… जी हां शिक्षाविद मुकेश रणवां द्वारा लिखित पुस्तक अन-लिमिटेड ज़िंदगी… जो सोशल मीडिया से लेकर लोगों की ज़ुबां पर सुनी और महसूस की जा रही है….
Un Limited Zindagi नामक पुस्तक में युवा शक्ति को लेकर विस्तृत विवेचन किया गया है… इसमे उन सभी पहलुओं को रेखांकित किया गया है जिनके जरिए किसी में भटकाव आता है चाहे वह नशाखोरी हो या फिर सोशल मीडिया एडिक्शन हो या इसी तरह के अन्य कारण… इसमें इसके कारण, परिणाम और समाधान के संदर्भ में वैज्ञानिक विधि को आधार बनाया गया।
इसमें टिपिंग प्वाइंट की समझ, काइजेन पद्धति, ईकीगाई निर्धारण, प्रथम सोच सिद्धांत आदि तकनीकों को विस्तार पूर्वक समझाया गया है… लेखक का मानना है कि सरल सहज और बोधगम्य भाषा में लिखी यह पुस्तक विद्यार्थियों अभिभावकों और शिक्षक साथियों के लिए समान रूप से लाभदायक रहेगी।
बारूद के बदले किताब
बारूद के बदले हाथों में आ जाए किताब तो अच्छा हो,
ऐ काश हमारी आँखों का इक्कीसवाँ ख़्वाब तो अच्छा हो।
ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर का यह शेर अपने मन-मस्तिष्क में थामे लेखक ने जब यह पुस्तक लिखी तो उनके जेहन में मोबाईल और इंटरनेट के साथ साथ धर्म और राजनीति के बारूद रूपी ढ़ेर से युवा शक्ति को किताबों की मखमली दुनिया में लाना रहा होगा…
लेखक का उद्देश्य किताबी ज्ञान को दुनियावी सफ़र का हिस्सेदार बनाकर दायरों में सिमटी ज़िंदगी को अनलिमिटेड ज़िंदगी में तब्दील करना रहा होगा … जहां से कोई कैसे अपनी खींची खिंचाई सीमा को पार कर नई सीमाओं को तैयार करना और इसी तरह और आगे की सीमाओं को पहचानना तथा आगे की संभावनाओं तक जाना रहा होगा…
निश्चित रूप से यह किताब संभावना के हर दायरे को पहचानने और उसे विस्तार देने के लिए लिखी गई है
लेखक परिचय
Un Limited Zindagi नामक पुस्तक के लेखक मुकेश रणवा जो राजस्थान के सीकर जिले के ग्रामीण अंचल भीराना, लोसल से ताल्लुक रखते हैं आप राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग में कार्यरत लोकसेवक है
मुकेश रणवा विगत 18 सालों में निजी शिक्षण संस्थानों से लेकर राजकीय शिक्षण संस्थानों में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से विद्यार्थी जीवन को करीब से महसूस किया है। आपने सामाजिक ताने-बाने, नवोन्मेषी सोच और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया हैंडल्स पर विगत कई वर्षो में सैंकड़ों आलेख लिखे हैं
उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए आपने युवा शक्ति के आरम्भिक जीवन के भटकावों और उनसे उपजे परिणामों को लेकर विस्तृत विवेचन किया है साथ ही इन डिस्ट्रक्शन को कम करने के उपाय सुझाए हैं।
यह प्रयास किया गया है कि कोई कैसे अपनी जिंदगी की संभावनाओं को लिमिटेड से अन-लिमिटेड कर सके। लेखक का मानना है कि दायरों में सिमटी ज़िंदगी को अन-लिमिटेड ज़िंदगी में तब्दील करने के लिए यह पुस्तक कारगर साबित होगी
लेखक की जुबानी
अनलिमिटेड ज़िंदगी” नामक पुस्तक के जरिए लेखक युवा वर्ग की समस्याओं को संबोधित करते हुए उनके उचित समाधान के उपाय भी सुझाए हैं। लेखक स्वयं शिक्षा विभाग में 18 सालों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं
ऐसे में विद्यार्थी जीवन को बेहद करीब से महसूस किया है साथ ही स्वयं राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा तैयारी के निजी अनुभवों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़े अभ्यर्थियों को भी नजदीक से देखा और महसूस किया है ऐसे में अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभवों को संबोधित करते हुए मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से समस्या समाधान को रेखांकित किया है।
इसमें विभिन्न सफल अनुभवों के साथ आगे बढ़े लोगों को बतौर उदाहरण पेश करते हुए उन नब्जों को टटोलने की कोशिश की गई है जिसके जरिए कोई कैसे अपनी संभावनाओं के क्षेत्र को महसूस कर सकता है। साथ ही उचित समाधान भी सुझाए गए हैं।
इसके साथ युवा पीढ़ी के द्वारा नशे और सोशल मीडिया एडिक्शन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई है। युवा पीढ़ी के संदर्भ यह पुस्तक बेहद प्रभावशाली नजर आएंगी।
Un Limited Zindagi FAQ
Un Limited Zindagi पुस्तक के लेखक कौन है
अन-लिमिटेड ज़िंदगी नामक पुस्तक के लेखक मुकेश रणवा जो राजस्थान के सीकर जिले के ग्रामीण अंचल भीराना, लोसल से ताल्लुक रखते हैं
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